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    होंडा सिटी और फ़ॉक्सवैगन वर्टूस में से कौन है आगे?

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    Bilal Ahmed Firfiray

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    Volkswagen Virtus Right Front Three Quarter

    परिचय

    हालांकि आज के समय में एसयूवी गाड़ियां चर्चा में हैं, होंडा सिटी और फ़ॉक्सवैगन वर्टूस के आकर्षक डिज़ाइन के चलते ग्राहक इन दोनों गाड़ियों को काफ़ी पसंद करते हैं। इन दोनों गाड़ियों के फ़ीचर्स, फ़्यूल इफ़िशंसी और परफ़ॉर्मेंस की तुलना नीचे की गई है।

    स्पेसिफ़िकेशन

    होंडा सिटी पेट्रोल और डीज़ल इंजन के विकल्प में उपलब्ध है। इसमें 1.5-लीटर चार-सिलेंडर डीज़ल इंजन है, जो 98bhp का पावर और 200Nm का टॉर्क जनरेट करता है। इसमें सिर्फ़ मैनुअल गियरबॉक्स को जोड़ा गया है। दूसरा इसमें 1.5-लीटर चार-सिलेंडर नैचुरली एस्पिरेटेड आईवीटेक पेट्रोल इंजन है, जो 119bhp का पावर और 145Nm का टॉर्क प्रोड्यूस करता है। इसमें छह-स्पीड मैनुअल और सीवीटी ऑटोमैटिक गियरबॉक्स को जोड़ा गया है। बता दें, कि कंपनी ने कुछ महीने पहले भारत में नए सिटी हाइब्रिड वर्ज़न को लॉन्च किया था।

    वर्टूस डीज़ल इंजन में उपलब्ध नहीं है, लेकिन इसमें दो पेट्रोल इंजन्स का विकल्प दिया गया है। इसमें 1.0-लीटर तीन-सिलेंडर टर्बोचार्ज्ड टीएसआई इंजन है, जो 114bhp का पावर और 178Nm का टॉर्क जनरेट करता है। इसमें छह-स्पीड मैन्युअल और टॉर्क कन्वर्टर ऑटोमैटिक यूनिट को जोड़ा गया है, वहीं डीएसजी का विकल्प उपलब्ध नहीं है। बता दें, कि डीएसजी यूनिट 1.5-लीटर चार-सिलेंडर टर्बोचार्ज्ड टीएसआई ईवीओ इंजन के साथ मिल रहा है, जो 148bhp का पावर और 250Nm का टॉर्क प्रोड्यूस करता है।

    एआरएआई के अनुसार, वर्टूस 1.0-लीटर मैनुअल 19.40 किमी प्रति लीटर की फ़्यूल इफ़िशंसी देती है, वहीं सिटी की फ़्यूल इफ़िशंसी 17.8 किमी प्रति लीटर है। कारवाले की टीम ने इसे पूरी तरह से टेस्ट किया है, जिससे इसके असल आंकड़ों का पता चला है।

    चलाने में कैसी है?

    फ़ॉक्सवैगन वर्टूस 1.0-लीटर मैनुअल

    वर्टूस 1.0-लीटर टीएसआई में तीन सिलेंडर इंजन है, इसके बावजूद यह शुरू करने पर हिलती नहीं है। इसका गियरबॉक्स और ज़्यादा बेहतर हो सकता था, वहीं क्लच इस्तेमाल करने में हल्का और आसान महसूस होता है। स्टीयरिंग वील सही जगह पर दिया गया है, जिससे सामने के रस्ते साफ़ दिखाई देते हैं।

    इसमें इंजन स्टार्ट/स्टॉप फ़ंक्शन है, जिससे इंजन बंद हो जाता है और क्लच दबाने पर ही शुरू होता है। इससे फ़्यूल की बचत होती है और वर्टूस की फ़्यूल इफ़िशंसी बढ़ जाती है। साथ ही इस 1000cc इंजन मोटर की मदद से आसानी से 100 किमी प्रति घंटे की रफ़्तार तक पहुंचा जा सकता है, लेकिन तीन-सिलेंडर की वजह से इंजन से काफ़ी आवाज़ आती है।

    होंडा सिटी 1.5-लीटर मैनुअल

    होंडा सिटी में काफ़ी मज़बूत चार-सिलेंडर नैचुरली एस्पिरेटेड इंजन है। यह बिलकुल थरथराती नहीं है और बार बार गियर को बदलने की ज़रुरत महसूस नहीं होती। अगर आप शहर में छठे गियर पर 50-60 किमी प्रति घंटे की रफ़्तार पर गाड़ी चला रहे हैं और स्पीड ब्रेकर आने पर स्पीड को 35 किमी प्रति घंटे की रफ़्तार तक घटाते के बावजूद इंजन से कोई आवाज़ नहीं आती है। इससे गियर को बार-बार बदलने की ज़रुरत नहीं पड़ती। इसका गियरबॉक्स और क्लच इस्तेमाल करने में काफ़ी आसान है। सिटी का केबिन आरामदायक है और रोड की विज़िब्लिटी काफ़ी अच्छी है, जिससे लंबी यात्रा में तकलीफ़ नहीं होती है।

    ट्रैफ़िक में होंडा सिटी का पिक-अप काफ़ी अच्छा है और रफ़्तार पकड़ने के बाद भी इंजन से कोई आवाज़ नहीं आती, चाहे गियर बदलने में देरी क्यों ना हो।

    परफ़ॉर्मेंस और फ़्यूल इफ़िशंसी

    सिटी पेट्रोल मैनुअल वर्टूस से तेज़ है। यह 4.78 सेकेंड्स के समय में 0 से 60 किमी प्रति घंटे की रफ़्तार तक पहुंचती है। वहीं वर्टूस 5.35 सेकेंड्स में 0 से 100 किमी प्रति घंटे की रफ़्तार तक पहुंचती है।

    तीसरे गियर में 20 से 80 किमी प्रति घंटे की रफ़्तार पर पहुंचने में वर्टूस ने सिटी से 2 सेकेंड्स कम समय लगाया, वहीं चौथे गियर में 40 से 100 किमी प्रति घंटे की रफ़्तार पर पहुंचने में वर्टूस से सिटी से 5 सेकेंड्स कम समय लगाया।

    हमने हमने दोनों गाड़ियों की असल फ़्यूल इफ़िशंसी का पता लगाया, जिससे पता चला, कि फ़ॉक्सवैगन वर्टूस पेट्रोल मैनुअल की फ़्यूल इफ़िशंसी शहर में 15.39 किमी प्रति लीटर है और हाइवे ओर पर 19.52 किमी प्रति लीटर है, जिससे इसकी कुल फ़्यूल इफ़िशंसी 16.35 किमी प्रति लीटर बनती है। इसकी फ़्यूल क्षमता 45 लीटर है और 730 किमी की रेंज देती है।

    होंडा सिटी की फ़्यूल इफ़िशंसी शहर में 14.1 किमी प्रति लीटर है और हाइवे पर 18.24 लीटर है, जिससे इसकी कुल फ़्यूल इफ़िशंसी 15.17 लीटर बनती है। इसकी फ़्यूल क्षमता 40 लीटर है और 600 किमी की रेंज देती है।

    निष्कर्ष

    दोनों ही सिडैन्स का इंजन पूरी तरह से अलग है। पहला चार सिलेंडर, नैचुरली एस्पिरेटेड इंजन है, तो वहीं दूसरा छोटा तीन-सिलेंडर, टर्बोचार्ज्ड इंजन है।

    दोनों गाड़ियों को चलाने के बाद पता चला, कि दोनों के ही कुछ फ़ायदे और नुक़सान हैं। सिटी का इंजन परफ़ॉर्मेंस काफ़ी अच्छा है, वहीं वर्टूस का 1.0-लीटर टर्बो पावर इंजन काफ़ी तेज़ है।

    अनुवाद: विनय वाधवानी

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