
- कंपनी की कुल बिक्री में 60% हिस्सेदारी
- इसी साल आएगा दोनों का फ़ेसलिफ़्ट
फ़ॉक्सवैगन इंडिया के लिए वर्टूस और टाइगुन के टॉप-स्पेक वेरीएंट्स बड़ी ताक़त बनकर उभरे हैं। कंपनी के मुताबिक़, उसकी कुल बिक्री का क़रीब 60 प्रतिशत हिस्सा जीटी, जीटी प्लस और जीटी स्पोर्ट प्लस वेरीएंट्स से आ रहा है। दिलचस्प बात यह है कि, इस मांग का बड़ा हिस्सा ऑटोमैटिक गियरबॉक्स वाले मॉडल्स की ओर झुका हुआ है, चाहे इंजन कोई भी हो।
फ़ॉक्सवैगन वर्टूस और टाइगुन दोनों में जीटी वेरीएंट 1.0-लीटर और 1.5-लीटर पेट्रोल इंजन ऑप्शन के साथ उपलब्ध है। वहीं जीटी प्लस, जीटी प्लस क्रोम और जीटी स्पोर्ट प्लस वेरीएंट्स सिर्फ़ 1.5-लीटर पेट्रोल इंजन के साथ दिए जाते हैं, जिसे सात-स्पीड डीएसजी ऑटोमैटिक गियरबॉक्स से जोड़ा गया है। यह 1.5-लीटर इंजन 148bhp की पावर और 250Nm का टॉर्क जनरेट करता है, जो परफ़ॉर्मेंस पसंद करने वाले ग्राहकों को ख़ासा आकर्षित कर रहा है।

कंपनी ने यह भी कन्फ़र्म किया है कि, वर्टूस और टाइगुन दोनों को इसी साल मिड-लाइफ फ़ेसलिफ़्ट मिलने वाला है। इसकी घोषणा हाल ही में फ़ॉक्सवैगन टेरॉन R-लाइन को पेश करने के दौरान की गई थी। उम्मीद है कि, इन अपडेट्स में इक्सटीरियर डिज़ाइन में बदलाव के साथ-साथ नए फ़ीचर्स भी जोड़े जाएंगे, जो हाल ही में पेश किए गए स्कोडा कुशाक फ़ेसलिफ़्ट से मिलते-जुलते हो सकते हैं।
साथ ही फ़ॉक्सवैगन ने यह भी संकेत दिया है कि, 2026 के आख़िर तक टेरॉन, टाइगुन और वर्टूस के अलावा, तीन और नई कार्स भारतीय बाज़ार में उतारी जाएंगी। इससे साफ है कि, ब्रैंड आने वाले समय में अपने पोर्टफ़ोलियो को और मज़बूत करने की रणनीति पर काम कर रहा है।
इसके अलावा, फ़ॉक्सवैगन इंडिया ने खुलासा किया है कि, वह अपने इंडिया 2.0 मॉडल्स के लिए एडास टेक्नोलॉजी पर भी काम कर रही है। हालांकि, फ़िलहाल कंपनी ने यह नहीं बताया है कि, एडास फ़ीचर्स को कार्स में कब तक शामिल किया जाएगा।
कुल मिलाकर, टॉप वेरीएंट्स की बढ़ती डिमांड और आने वाले फ़ेसलिफ़्ट के साथ, फ़ॉक्सवैगन वर्टूस और टाइगुन आने वाले महीनों में सेग्मेंट में अपनी पकड़ और मज़बूत कर सकती हैं।
अनुवाद: गुलाब चौबे

















































