
निसान इंडिया के लिए साल 2026 और उसके बाद का समय बेहद अहम रहने वाला है। कंपनी इसी महीने ग्रैवाइट एमपीवी लॉन्च करने जा रही है, जबकि टेक्टॉन एसयूवी को मिड-2026 में और एक नई सात-सीटर सी-एसयूवी को 2027 की शुरुआत में बाज़ार में उतारने की तैयारी चल रही है।
दस्तावेज़ो के मुताबिक़, यह लाइन-अप निसान की भारत में अपनी खोई हुई पहचान को दोबारा मज़बूत करने की भरपूर कोशिश करने की ओर इशारा करता है।
पिछले कुछ वर्षों में निसान की सबसे बड़ी चुनौती रही है उसकी धीमी प्रॉडक्ट लॉन्च रणनीति। लंबे समय तक नई कार्स न आने की वजह से ब्रैंड की मौजूदगी कमज़ोर हुई और बाज़ार में पहचान भी फ़ीकी पड़ती चली गई। अब ग्रैवाइट, टेक्टॉन और आगामी सात-सीटर एसयूवी के ज़रिए निसान लगभग 18 महीनों में तीन बड़े मॉडल लॉन्च करने की तैयारी में है। यह रणनीति पहले के मुक़ाबले बिल्कुल अलग है, जहां कंपनी काफ़ी हद तक सिर्फ़ मैग्नाइट पर निर्भर थी।
इस नई रणनीति का सबसे बड़ा फ़ायदा यह हो सकता है कि, निसान को लगातार सेल्स मोमेंटम बनाने का मौक़ा मिलेगा। एक ही कार के भरोसे बाज़ार में टिके रहने के बजाय, अलग-अलग सेग्मेंट में मौजूदगी ब्रैंड को ज़्यादा मज़बूती दे सकती है। ग्रैवाइट एमपीवी निसान को किफ़ायती फैमिली कार सेग्मेंट में उतार सकती है, जहां क़ीमत सबसे बड़ा फैक्टर होती है। ऐसे में उम्मीद है कि, निसान इसकी प्राइसिंग काफ़ी आक्रामक रखेगी।

वहीं निसान टेक्टॉन कंपनी के लिए सबसे अहम प्रॉडक्ट साबित हो सकती है। यह एसयूवी निसान को सीधे मिड-साइज़ एसयूवी सेग्मेंट में ऐंट्री दिलाएगी, जो इस समय भारत का सबसे ज़्यादा बिकने वाला और मुनाफ़े वाला सेग्मेंट है। हालांकि, यहां मुक़ाबला बेहद कड़ा है और ज़्यादातर प्रतिद्वंदी नए-जनरेशन मॉडल्स के साथ पहले से मज़बूत पकड़ बनाए हुए हैं। ऐसे में टेक्टॉन की वैल्यू-फ़ॉर-मनी अपील और फ़ीचर-पैकेज निसान के लिए निर्णायक साबित होंगे।
एक और अहम पहलू यह है कि, अगर टेक्टॉन घरेलू बाज़ार में बड़ी संख्या में नहीं बिक पाती, तो निसान इसे मैग्नाइट की तरह हाई-वॉल्यूम एक्सपोर्ट मॉडल के तौर पर भी इस्तेमाल कर सकती है। इससे भारत में कंपनी की मैन्युफ़ैक्चरिंग और ऑपरेशंस को लंबे समय तक सपोर्ट मिल सकता है।
अनुवाद: गुलाब चौबे















































