
- नई पजेरो में लैडर-फ्रेम चेसी
- 2.4-लीटर डीज़ल इंजन, 4WD और टेक्नोलॉजी से भरपूर केबिन
मित्सुबिशी पजेरो की वापसी हो गई है। पांच साल के ब्रेक के बाद मित्सुबिशी ने अपनी मशहूर एसयूवी की बिल्कुल नई पीढ़ी पेश कर दी है, जिसके साथ यह नाम एक बार फिर कंपनी के प्रमुख क्रॉस-कंट्री मॉडल के तौर पर वापस आया है। कागज़ पर देखें तो यह लगभग वही सब कुछ है, जो पुरानी पजेरो के प्रशंसक एक आधुनिक उत्तराधिकारी से चाहते थे।
नई मित्सुबिशी पजेरो का डिज़ाइन
मित्सुबिशी ने पजेरो को किसी दूसरी गोल-मटोल क्रॉसओवर एसयूवी में बदलने से परहेज किया है। नई एसयूवी में इस नाम से जुड़ा सीधा और चौकोर डिज़ाइन बरकरार रखा गया है, जिसमें लंबा बोनट, सीधा फ्रंट हिस्सा, उभरे हुए वील आर्च और मज़बूत शोल्डर लाइन दी गई है।
डिज़ाइन आधुनिक है, लेकिन जान-बूझकर रफ़ और मज़बूत रखा गया है, जबकि कई डिज़ाइन डिटेल्स पिछली पीढ़ियों से जुड़ी हुई हैं। मित्सुबिशी के मुताबिक, सी-पिलर का डिज़ाइन पहली पजेरो के रोल बार से प्रेरित है, जबकि पीछे दिया गया हेक्सागोनल डिज़ाइन पुराने मॉडल में इस्तेमाल किए गए स्पेयर-वील डिज़ाइन का आधुनिक रूप है।
फ्रंट में टी-शेप एलईडी लाइटिंग और चौड़ी ग्रिल दी गई है, जबकि टॉप वेरीएंट्स में हनीकॉम्ब डिज़ाइन मिलता है। कुल मिलाकर, नई पजेरो अपने पुराने मॉडल से ज्यादा प्रीमियम दिखती है, लेकिन इसका रफ़ और दमदार अंदाज़ बरकरार है।

गंभीर ऑफ-रोडिंग के लिए तैयार
नई पजेरो को ट्राइटन पिकअप से ली गई लैडर-फ्रेम आर्किटेक्चर पर तैयार किया गया है, हालांकि मित्सुबिशी ने इसे एसयूवी के हिसाब से काफी बदलावों के साथ इस्तेमाल किया है। इसकी लंबाई 4,920mm, चौड़ाई 1,925mm और ऊंचाई 1,910mm है, जबकि इसका वीलबेस 2,870mm है।
इसमें 230mm का ग्राउंड क्लीयरेंस मिलता है, जबकि इसका अप्रोच एंगल 30.4 डिग्री और डिपार्चर एंगल 25.8 डिग्री है।
480Nm का टॉर्क प्रोड्यूस करने वाले 2.4-लीटर डीज़ल इंजन के साथ
पावर के लिए इसमें 2.4-लीटर टर्बो-डीज़ल इंजन दिया गया है, जो अधिकतम 480Nm का टॉर्क जनरेट करता है। मित्सुबिशी ने अभी इसके फाइनल पावर आउटपुट की जानकारी नहीं दी है। इस इंजन में वेरिएबल-ज्योमेट्री टर्बोचार्जर दिया गया है और इसे नए 8-स्पीड ऑटोमैटिक ट्रैंस्मिशन के साथ जोड़ा गया है, जिसमें स्पोर्ट मोड भी मिलता है।
इसमें मित्सुबिशी का सुपर सिलेक्ट 4WD-II सिस्टम और सुपर-ऑल वील कंट्रोल भी दिया गया है, जो एक्टिव यॉ कंट्रोल, ट्रैक्शन कंट्रोल और ABS के साथ मिलकर गाड़ी की पकड़ और स्थिरता को नियंत्रित करता है।

नई पजेरो का इंटीरियर और फ़ीचर्स
पिछली पीढ़ी की पजेरो केबिन टेक्नोलॉजी के मामले में नई प्रतिद्वंद्वी एसयूवी से पीछे रह गई थी। नई पजेरो में इसे ध्यान में रखते हुए काफी आधुनिक इंटीरियर दिया गया है, जिसमें हॉरिजॉन्टल डैशबोर्ड और बड़े डिस्प्ले शामिल हैं।
डैशबोर्ड पर दो 14.3-इंच स्क्रीन दी गई हैं। इसके अलावा इसमें 3-ज़ोन क्लाइमेट कंट्रोल, वेंटिलेटेड सीट्स और 12-स्पीकर वाला यामाहा अल्टीमेट साउंड सिस्टम मिलता है। इसमें बेहतर साउंड इंसुलेशन भी दिया गया है। तीन-पंक्ति वाले केबिन में स्लाइडिंग सेकंड रो भी जारी रखी गई है, जिसे 150mm तक आगे-पीछे किया जा सकता है, ताकि यात्रियों और सामान के लिए जगह को जरूरत के हिसाब से बदला जा सके।
सेफ्टी फीचर्स में एडवांस्ड ड्राइवर असिस्टेंस सिस्टम, 8 एयरबैग और मित्सुबिशी का पहला SRS सेंटर एयरबैग शामिल है। इसमें 3D मल्टी-अराउंड मॉनिटर भी मिलता है, जिसमें ऐसा व्यू भी दिया गया है जो ड्राइवर को गाड़ी के नीचे और सामने के इलाके का रास्ता देखने में मदद करता है।
मित्सुबिशी की भारत में कहानी
मित्सुबिशी ने 1998 में हिंदुस्तान मोटर्स के साथ तकनीकी साझेदारी के जरिए भारत में एंट्री की थी। इस साझेदारी के तहत कंपनी ने यहां लांसर, सिडिया, पजेरो, मॉन्टेरो, आउटलैंडर और पजेरो स्पोर्ट जैसे कई मॉडल पेश किए।
हालांकि, जैसे-जैसे दूसरी कंपनियां नए मॉडल लेकर आती गईं, मित्सुबिशी अपने प्रोडक्ट पोर्टफोलियो को प्रतिस्पर्धी बनाए रखने में संघर्ष करती रही। कंपनी का छोटा सेल्स और सर्विस नेटवर्क, कम बिक्री और स्पेयर पार्ट्स की उपलब्धता को लेकर चिंताओं ने भी उसकी स्थिति को और कमजोर किया।
आखिरकार BS6 नियमों में बदलाव के साथ भारत में मित्सुबिशी की पैसेंजर वीइकल मौजूदगी खत्म हो गई, क्योंकि कंपनी के मौजूदा मॉडल नए उत्सर्जन नियमों के हिसाब से अपडेट नहीं किए गए थे।

नई पजेरो शायद भारत क्यों नहीं आएगी
नई पजेरो भारत के लिए बिल्कुल सही साबित हो सकती है। इसमें प्रीमियम एसयूवी सेगमेंट के ख़रीदारों को पसंद आने वाला बड़ा आकार, डीज़ल इंजन, तीन-पंक्ति वाला केबिन और असली 4-वील-ड्राइव सिस्टम दिया गया है।
लेकिन सबसे बड़ी चुनौती इसे भारत लाने की है। सीबीयू के तौर पर लॉन्च करने पर पजेरो काफी महंगी हो जाएगी, जबकि स्थानीय स्तर पर असेंबल करने के लिए मैन्युफैक्चरिंग, सप्लायर्स, डीलरशिप, सर्विस इंफ्रास्ट्रक्चर और पार्ट्स डिस्ट्रीब्यूशन में काफी निवेश करना होगा। इसके अलावा, मित्सुबिशी को कई साल तक बाजार से दूर रहने के बाद ग्राहकों का भरोसा भी दोबारा हासिल करना होगा।
भारत में पहले से मौजूद कंपनियों के पास मजबूत डीलर नेटवर्क और भरोसेमंद ग्राहक आधार है। इनमें टोयोटा फॉर्च्यूनर प्रीमियम बॉडी-ऑन-फ्रेम एसयूवी सेगमेंट में लगातार मजबूत पकड़ बनाए हुए है।
नई पजेरो को एक प्रीमियम ग्लोबल फ्लैगशिप के तौर पर तैयार किया गया है, जिसमें आधुनिक 4-वील-ड्राइव इलेक्ट्रॉनिक्स, एडास, कई डिस्प्ले और प्रीमियम फीचर्स दिए गए हैं। इससे यह एक ज्यादा पूरी और बेहतर एसयूवी बनती है, लेकिन भारत के लिए यह ज्यादा महंगी और जटिल गाड़ी भी साबित हो सकती है।
भारतीय कार प्रेमियों के लिए नई पजेरो ऐसी गाड़ी है, जो सही समय के बजाय गलत समय पर सही प्रोडक्ट लेकर आई है। भारत शायद इसका स्वागत करेगा, लेकिन मित्सुबिशी को पहले भारत में वापस आने की कोई ठोस वजह तलाशनी होगी।






































