
- पिछले साल की तुलना में आई है गिरावट
- हाल ही में मारुति ने अपने सभी कार्स में छह एयरबैग्स देने का किया है ऐलान
मारुति सुज़ुकी ने अप्रैल 2025 के लिए अपनी बिक्री के आंकड़े जारी कर दिए हैं। कंपनी ने घरेलू और निर्यात मिलाकर कुल 1,79,791 यूनिट्स बेचीं, जो पिछले साल अप्रैल 2024 में बेची गई 1,68,089 यूनिट्स से बेहतर है। यानी कंपनी की कुल बिक्री में तो बढ़ोतरी दिख रही है, लेकिन उसके ऐंट्री-लेवल मॉडल्स के लिए हालात चिंताजनक हैं। हालांकि, मारुति ने हाल ही में अपनी सभी मॉडल्स में स्टैंडर्ड तौर पर छह एयरबैग्स देने का फ़ैसला लिया है, जिससे ऑल्टो K10 अब भारत की सबसे किफ़ायती छह एयरबैग्स वाली मॉडल बन गई है। आइए अब हम इस आर्टिकल में मारुति की इस बिक्री के बारे में विस्तार से बताने जा रहे हैं।
ऑल्टो और एस-प्रेसो की बिक्री में आधे से भी ज़्यादा गिरावट

पिछले साल अप्रैल 2024 में मारुति ने ऑल्टो और एस-प्रेसो की 11,519 यूनिट्स बेची थीं। वहीं, अप्रैल 2025 में यह आंकड़ा गिरकर सिर्फ़ 6,332 यूनिट्स पर आ गया। यह लगभग 45% से ज़्यादा की गिरावट है, जो बताती है कि लोग अब बेसिक और सस्ती कार्स की तरफ पहले जैसा रुझान नहीं दिखा रहे।
क्यों घट रही है ऐंट्री-लेवल कार्स की डिमांड?
इस गिरावट की सबसे बड़ी वजह है कस्टमर्स के प्रेफ़रेंस में बदलाव। अब लोग छोटी कार भी ख़रीद रहे हैं तो, उसमें सुरक्षा, फ़ीचर्स और कम्फ़र्ट को नज़रअंदाज नहीं कर रहे। लोगों को अब क्रॉसओवर, एसयूवी लुक, बड़ा केबिन, टचस्क्रीन, 6 एयरबैग्स जैसी चीज़ें चाहिए और इसके लिए वो थोड़ा एक्स्ट्रा ख़र्च करने को भी तैयार हैं।

एसयूवी और प्रीमियम हैचबैक को मिल रही बढ़त
एक तरफ जहां ऑल्टो और एस-प्रेसो जैसे मॉडल्स नीचे गिर रहे हैं, वहीं मारुति की बाकी रेंज अच्छा प्रदर्शन कर रही है। इनमें स्विफ़्ट, बलेनो, डिज़ायर, इग्निस और वैगन आर जैसी कार्स की बिक्री बढ़ी है। बात करें एसयूवी सेग्मेंट की, तो इसमें फ्रॉन्क्स, ब्रेज़ा और ग्रैंड विटारा जैसी कार्स को भी तगड़ा रिस्पॉन्स मिला है। इन आंकड़ों से साफ पता चलता है कि, कस्टमर अब ऐंट्री-लेवल सेग्मेंट से थोड़ा ऊपर की तरफ बढ़ रहे हैं।
क्या मारुति ऑल्टो और एस-प्रेसो की नई जनरेशन या अपग्रेडेड वर्ज़न करेगी पेश?

अभी के लिए मारुति सुज़ुकी की तरफ से कोई नई ऑल्टो या एस-प्रेसो अपडेट की घोषणा नहीं हुई है, लेकिन इस गिरते ट्रेंड को देखकर यह कहना गलत नहीं होगा कि, कंपनी को जल्द ही इन मॉडल्स के लिए कुछ नया प्लान करना पड़ेगा, वरना ये मॉडल्स बिक्री चार्ट से गायब भी हो सकते हैं।
अन्य ख़बरों में । लेकिन अब सवाल सिर्फ़ इतना है कि, क्या भारत के कार ख़रीदार अब ‘कम क़ीमत’ के बजाय ‘ज़्यादा वैल्यू’ को प्राथमिकता देने लगे हैं? ऑल्टो और एस-प्रेसो की गिरती बिक्री शायद इसका जवाब है।

















































