
- 2 और 6 एयरबैग्स वर्ज़न में दिखा साफ़ फ़र्क
- यह स्कोर भारत में बिकने वाली सिलेरियो पर भी होगा लागू
भारत में ऐंट्री-लेवल हैचबैक कार्स आज भी बड़ी संख्या में ख़रीदी जाती हैं, लेकिन अब ग्राहक सिर्फ़ माइलेज नहीं, बल्कि सेफ़्टी को भी उतनी ही अहमियत देने लगे हैं। इसी बीच मेड-इन-इंडिया मारुति सुज़ुकी सिलेरियो की ग्लोबल एनकैप क्रैश टेस्ट रिपोर्ट सामने आई है, जिसमें एयरबैग की संख्या के आधार पर सेफ़्टी में साफ़ अंतर देखने को मिला है।
दो एयरबैग्स वाले सिलेरियो वर्ज़न को अडल्ट ऑक्यूपेंट प्रोटेक्शन में 2-स्टार और चाइल्ड ऑक्यूपेंट प्रोटेक्शन में सिर्फ़ 1-स्टार मिला। इस वर्ज़न ने अडल्ट सेफ़्टी में 34 में से 18.04 पॉइंट्स और चाइल्ड सेफ़्टी में 49 में से 9.52 पॉइंट्स हासिल किए। फ्रंटल ऑफ़सेट क्रैश टेस्ट में ड्राइवर और आगे बैठे पैसेंजर के सिर की सुरक्षा ठीक-ठाक रही, लेकिन ड्राइवर की छाती की सुरक्षा कमजोर पाई गई। इसके अलावा, कार का बॉडीशेल और फुटवेल एरिया अस्थिर बताया गया, जिससे भारी टक्कर में सेफ़्टी सीमित रहने का संकेत मिलता है।

चाइल्ड सेफ़्टी स्कोर कम रहने की वजह फ्रंटल टक्कर में कमज़ोर सुरक्षा, सभी सीट्स पर थ्री-पॉइंट सीटबेल्ट की कमी और फ्रंट पैसेंजर एयरबैग को बंद करने का विकल्प न होना रही।
वहीं, छह एयरबैग्स वाले मारुति सिलेरियो वर्ज़न ने बेहतर प्रदर्शन किया। इसे अडल्ट सेफ़्टी में 3 स्टार और चाइल्ड सेफ़्टी में 2 स्टार मिले। चाइल्ड प्रोटेक्शन में इस वर्ज़न ने 18.57 पॉइंट्स हासिल किए। साइड बॉडी और कर्टन एयरबैग मिलने से साइड इम्पैक्ट और साइड पोल टेस्ट में सिर और छाती की सुरक्षा में बेहतर सुधार देखा गया है।
हालांकि, फ्रंटल टक्कर में ड्राइवर की छाती की सुरक्षा अब भी कमज़ोर रही और बॉडीशेल को अस्थिर ही माना गया। यह रेटिंग भारत में बनी और भारत में बिकने वाली सिलेरियो कार्स पर लागू होती है, और छह एयरबैग्स वर्ज़न के लिए VIN MA3TFC62SRM323533 से मान्य है।
अनुवाद: गुलाब चौबे
















































