
- केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रीनितिनगडकरी ने किया बड़ा ऐलान
- बढ़ती तेल महंगाई और फ़्यूल किल्लत के बीच इथेनॉल-हाइड्रोजन पर बड़ा फ़ोकस
भारत में लगातार बढ़ती पेट्रोल-डीज़ल की क़ीमतों और इंटरनेशनल मार्केट में तेल सप्लाई को लेकर बढ़ती चिंता के बीच अब सरकार वैकल्पिक फ़्यूल्स पर तेज़ी से काम कर रही है। इसी कड़ी में केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने बड़ा ऐलान करते हुए कहा है कि, इस साल वर्ल्ड एनवायरमेंट डे यानी 5 जून को कई बड़ी ऑटो कंपनीज़ अपनी नई फ़्लेक्स-फ़्यूल वीइकल्स (FFV) को शोकेस करेंगी।
गडकरी के मुताबिक़ इस इवेंट में मारुति सुज़ुकी, टोयोटा, महिंद्रा और टाटा जैसी कंपनीज़ हिस्सा लेंगी। ये सभी कंपनीज़ E100-कम्पैटिबल फ़्लेक्स-फ़्यूल कार्स पेश करेंगी, जो 100 प्रतिशत इथेनॉल आधारित फ़्यूल पर चल सकती हैं।
आज के समय में पश्चिम एशिया में जारी तनाव, इंटरनेशनल क्रूड ऑयल की बढ़ती क़ीमतें और तेल सप्लाई में अनिश्चितता ने दुनियाभर के देशों की चिंता बढ़ा दी है। भारत भी अपनी ज़रूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है, जिसकी वजह से पेट्रोल और डीज़ल महंगे होते जा रहे हैं। यही कारण है कि, अब सरकार इथेनॉल, इलेक्ट्रिक और हाइड्रोजन जैसे विकल्पों पर ज़्यादा ज़ोर दे रही है, ताकि भविष्य में तेल की किल्लत और महंगे फ़्यूल से राहत मिल सके।
ऑटो इंडस्ट्री में चल रही चर्चाओं के मुताबिक़ मारुति सुज़ुकी इस इवेंट में अपनी फ़्रॉन्क्स FFV को पेश कर सकती है। दिलचस्प बात यह है कि, फ़्रॉन्क्स फ़्लेक्स फ़्यूल मॉडल को पिछले साल जापान मोबिलिटी शो में भी दिखाया गया था। ऐसे में अब इसके भारत में आने की उम्मीद काफ़ी मज़बूत मानी जा रही है।
अगर ऐसा होता है, तो टोयोटा की तरफ़ से अर्बन क्रूज़र टाइज़र FFV भी देखने को मिल सकती है, क्योंकि दोनों मॉडल्स कई मकैनिकल पार्ट्स शेयर करते हैं। हालांकि, कुछ रिपोर्ट्स में वैगन-आर FFV का नाम भी सामने आया है, लेकिन फ़िलहाल फ़्रॉन्क्स को लेकर ज़्यादा चर्चा हो रही है।
अपने भाषण में गडकरी ने भविष्य के फ़्यूल्स को लेकर भी बड़ा बयान दिया। उनके मुताबिक़ आने वाले समय में इथेनॉल, ईवी और हाइड्रोजन सबसे अहम भूमिका निभाएंगे। फ़िलहाल सरकार हाइड्रोजन आधारित वीइकल्स पर पायलट प्रोजेक्ट चला रही है।
इस टेस्टिंग में टोयोटा मिराई और हुंडई नेक्सो जैसी गाड़ियां शामिल हैं। माना जा रहा है कि, 5 जून के इवेंट में हाइड्रोजन मोबिलिटी को लेकर भी कुछ अहम अपडेट सामने आ सकते हैं, जिससे भारत में इस टेक्नोलॉजी के भविष्य का अंदाज़ा लगेगा।
मेरी राय में आने वाले कुछ साल भारतीय ऑटो इंडस्ट्री के लिए काफ़ी बड़े बदलाव लेकर आने वाले हैं। अब सिर्फ़ ईवी ही नहीं, बल्कि इथेनॉल और हाइड्रोजन जैसी टेक्नोलॉजी भी तेजी से आगे बढ़ रही हैं। अगर कंपनीज़ सही प्राइसिंग और बेहतर इंफ़्रास्ट्रक्चर के साथ इन विकल्पों को पेश करती हैं, तो भारतीय ग्राहकों को पेट्रोल और डीज़ल के मुक़ाबले सस्ते और पर्यावरण के लिए बेहतर विकल्प मिल सकते हैं।
















































